Friday, July 14, 2017

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                आप कैसे है? आज से ठीक एक साल पहले आप मुझे छोड़कर बहुत दूर चले गए और अपने पीछे जिंदगी की अमर खुशियों की सौगात छोड़ गए. 09 जुलाई 2016 का वो दिन अच्छे से याद है मुझे, जब सुबह-सुबह रतलाम से इंदौर जाते समय मैंने आपको खर्राटे भरते हुए चैन की नींद सोते हुए देखा था. कितनी खुश थी मैं उस दिन. अगले दिन ही मैंने आपके लिए इंदौर से गरम कपड़े खरीदे थे ताकि ठंडी हवा के थपेडो में भी आपका बदन ना कपकपाए, लेकिन मुझे क्या पता था कि आपकी जिद मेरी उम्मीदों को एक झटके में तोड़ देगी और मुझे अपने खरीदे उन कपड़ों को एक ऐसे बूत को पहनना पड़ेगा, जो जमीन पर लेटा तो है पर हिलता-डुलता नहीं, जिसके चेहरे पर आज भी वही तेज और मुस्कुराहट है, लेकिन वो बोलता नहीं.आखिर मुझसे ऐसी क्या भूल हुई, जो आपने मुझसे हमेशा की चुप्पी कर ली? दादू , प्लीज़ वापस आ जाओ ना. 
     ऐ दादू, सुनो ना, आज आपके इकलौते बेटे नाना यानि कि मेरे पापा का बर्थडे है.मुझे पता है अपने बेटे को आशीर्वाद देने के लिए आज आप जरूर आओगे.आज आपका कोई बहाना नहीं चलेगा वर्ना पापा का गुस्सा तो आप जानते ही हो ना. देखो, आज मैंने आपकी पसंद की कड़क जलेबी और काले गुलाबजामुन लिए है. मैं जानती हूँ कि ये दोनों चीजें आपकी कमजोरी है और आप इनकी खुशबू से ही नींद से जाग जाते थे. चाहे आप कितने भी बीमार क्यों न हो, गुलाबजामुन का नाम सुनते ही आपका मुँह बड़ा सा खुल जाता था. चलो, उठो दादू. .... अब उठ भी जाओ. दादू.....,आज आप क्यों नहीं जाग रहे हो? उठो ना दादू, अब रूठना छोड़ दो ना. 
पता है दादू, आपके जाने के 5 महीने बाद आपके घर प्यारा सा पड़पोता आया है बिल्कुल आप जैसा. उसकी आदतें आपसे इतनी मिलती है कि मुझे लगता है कि आप ही रूप बदलकर अब इस नए किरदार में आ गए है. मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण आप बचपन की अवस्था में पहुंचकर जैसी शरारतें करते थे, वैसी ही शरारतें आपका पड़पोता भी करता है. एकदम सेम टू सेम. बहुत प्यारा है वो. बिल्कुल आपकी परछाई .काश उसे भी हमारी तरह आपके कपकपाते हाथों से आशीर्वाद, आपकी जेब से निकला वो 10 रूपए का नोट, जो आप आपके पैर छूने वाले को देते थे और इसी के साथ ही सदा खुश रहने की दुआ मिल पाती. लेकिन आपको भी जाने की इतनी जल्दी थी कि उसे देखे बगैर और मुझसे मिले बगैर ही आप चले गए. 
दादू, आप जरा भी चिंता मत करना, आपके आशीर्वाद से हम सब यहाँ ठीक है. आप भी वहां अपना ध्यान रखना और हां एक और बात मेरे सपनों में आना मत भूलना , नहीं तो मैं आपसे नाराज हो जाउंगी..

आपकी यादों में .....
आपकी पोती 
गायत्री


Friday, March 10, 2017

लो आ गयी शरारतों वाली होली

लो आ गयी शरारतों वाली होली 
पिचकारियों के छिटो संग 
दोस्तों संग मौज-मस्ती और हँसी-ठिठौली
लो आ गयी ...
किसी ने गालों पर मल दिया गुलाल 
मित्रता के चटक रंग से, मस्ती की भंग से 
तन-मन हुआ, हरा-पीला, गुलाबी-लाल 
निकली आज तंग गलियों में वही पुरानी टोली 
लो आ गयी ...
यादों के झरोखों से मस्ती के पलों को चुराया जाए 
हुड़दंगी दोस्तों की महफ़िल को फिर से सजाया जाए 
तराने दोस्ती के आज फिर गुनगुना लो यारों
मस्ती के इस समां को रंगीन बना लो यारों 
लो आ गयी ... 
भागों,पकड़ो की गूंज मची है चारों ओर
हर तरफ है आज हँसी-ठहाकों औऱ गुब्बारों की पचाक का शोर 
बच ना जाए आज कोई, लगा लो पूरा जोर 
होली की हुड़दंग में हर दिल कहे वन्स मोर, वन्स मोर 
लो आ गयी ...
                                           - गायत्री 
चित्र साभार - गूगल